🎇 Diwali के नजदीक आते ही सुप्रीम कोर्ट में दिवाली के पटाखों पर सुनवाई जारी है, और ग्रीन पटाखों (Green Crackers) को "साफ" बताया जा रहा है। इस में हम जानेंगे कि इन पटाखे का असर सच में कितना कम है, और इसका सेहत पर क्या असर हो सकता है। चलिए तो पूरा जानते है।
📑 इस आर्टिकल के आप जानोगे।
🔹 दिवाली पर पटाखों का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में
🔹 ग्रीन पटाखे क्या हैं?
🔹 ग्रीन पटाखे सच में कितने साफ हैं?
🔹 फेफड़ों पर असर: किसे सबसे ज़्यादा खतरा?
🔹 अस्थमा और COPD वाले लोग क्या करें?
🔹 तुलना: पारंपरिक पटाखे बनाम ग्रीन पटाखे
🔹 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
🔹 निष्कर्ष
🪔 दिवाली पर पटाखों का मामला फिर सुप्रीम कोर्ट में

दिवाली 8 नवंबर 2026, रविवार को है, और उससे पहले पटाखों पर बहस फिर गर्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की 30 सितंबर 2026 की सुनवाई में जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और पी.बी. वराले की बेंच ने साफ कहा कि पटाखों पर पूरा प्रतिबंध नहीं लगेगा, लेकिन 24 घंटे पटाखे जलने की छूट भी नहीं होगी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने कहा कि पटाखों की इजाज़त का कोई भी फ़ैसला सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के बाद होगा।
सुनवाई में केंद्र सरकार ने कुछ "next-generation joined green crackers" पर सीमित और शर्तों वाली छूट का प्रस्ताव रखा। शर्तें थीं कि पटाखे लाइसेंसधारी निर्माता बनाएं, शोर की सीमा 125 dB(AI) के भीतर हो, और उनमें प्रतिबंधित रसायन न हों। मामला 15 अक्टूबर के लिए टाला गया था। इस लेख के प्रकाशन तक हमें इस मामले का अंतिम आदेश नहीं मिला है, इसलिए इसे अंतिम फ़ैसला न समझें।
💡 HealthyRaho Tip: कोर्ट के आदेश बदल सकते हैं। पटाखों के समय और बिक्री के नियम के लिए अपने राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या ज़िला प्रशासन की ताज़ा सूचना ज़रूर देखें।
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🌿 ग्रीन पटाखे क्या हैं?

"ग्रीन पटाखे" शब्द सुनकर लगता है जैसे ये प्रदूषण रहित हों, लेकिन असलियत अलग है। ये वे पटाखे हैं जिनका फ़ॉर्मूला बदला गया है ताकि धुआं और धूल कम निकले। CSIR-NEERI के अनुसार ग्रीन पटाखों में बेरियम या चारकोल नहीं होता, और उनकी पहचान CSIR-NEERI लोगो और QR कोड से होती है।
✔️ मुख्य बदलाव:
🔹 बेरियम जैसे भारी रसायनों का कम या न के बराबर उपयोग
🔹 कम धुआं और कम कण (particulate matter) उत्सर्जन
🔹 तुलनात्मक रूप से कम शोर
❌ जो ये नहीं हैं:
🔹 ये प्रदूषण-मुक्त नहीं हैं
🔹 ये सांस की बीमारी वालों के लिए सुरक्षित नहीं हैं
🔬 ग्रीन पटाखे सच में कितने साफ हैं?

यहीं सबसे बड़ी बहस है। आंकड़े सुनने में अच्छे लगते हैं, पर उन्हें ध्यान से पढ़ने की ज़रूरत है।
✳️ आंकड़े जो बताए जाते हैं:
🔹 विश्लेषकों के अनुसार पारंपरिक पटाखों की तुलना में ग्रीन पटाखों से कम से कम 30% कम कण उत्सर्जन होता है।
🔹 अगली पीढ़ी के पटाखों में PM10 (मोटे धूल कण) में 45 से 60% कटौती का दावा किया गया है।
🔹 शोर: ग्रीन पटाखों की आवाज़ लगभग 110 से 125 डेसिबल बताई जाती है, जबकि कुछ पारंपरिक पटाखे 160 डेसिबल तक जाते हैं।
⚠️ आंकड़ों के पीछे की सच्चाई:
🔹 लैब बनाम असल दुनिया: ये आंकड़े नियंत्रित परीक्षणों से आते हैं। एक पल्मोनोलॉजिस्ट के अनुसार आदर्श परिस्थितियों में भी कणों में केवल लगभग 20 से 30% कमी दिखती है, और असल हवा में यह और कम हो सकती है।
🔹 ज़्यादा पटाखे, वही नुकसान: अगर लोग "ग्रीन" पटाखे ज़्यादा संख्या में चलाएं, तो प्रति पटाखा कमी का फ़ायदा खत्म हो जाता है।
🔹 पहचान की दिक्कत: CAQM की एक जांच में पाया गया कि QR कोड ऐसे निर्माताओं को बेचे गए जो रजिस्टर्ड नहीं थे। इससे नकली पटाखे असली ग्रीन पटाखों की तरह बिक सकते हैं।
💡 HealthyRaho Tip: पटाखा खरीदते समय CSIR-NEERI लोगो और QR कोड दोनों देखें। लेकिन याद रखें, इनसे भी धुआं पूरी तरह खत्म नहीं होता।
HealthyRaho Takeaway: ग्रीन पटाखे पारंपरिक पटाखों से कम नुकसानदेह हो सकते हैं, पर ये प्रदूषण-मुक्त नहीं हैं। सांस की बीमारी वालों को इसके धुआं से भी खतरा है।
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🫁 फेफड़ों पर असर: किसे सबसे ज़्यादा खतरा?

पटाखों का धुआं हवा में बारीक कण (PM2.5 और PM10), सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक छोड़ता है। ये कण सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचते हैं और सूजन व संकुचन पैदा कर सकते हैं।
🔹 जल्दी असर दिखने वाले लक्षण:
खांसी और गले में जलन
सांस फूलना
आंखों में जलन और पानी आना
अस्थमा या COPD के लक्षण बढ़ जाना
🔹 सबसे ज़्यादा जोखिम वाले लोग:
👶 बच्चे, जिनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं
👴 बुज़ुर्ग
🤰 गर्भवती महिलाएं
🫁 अस्थमा, COPD और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस के मरीज़
❤️ दिल के मरीज़
एक डॉक्टर की चेतावनी थी कि "पटाखा तो पटाखा है", और कई डॉक्टर यह भी कहते हैं कि ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। एक अन्य रिपोर्ट में बताया गया कि पटाखों का धुआं भारी धातुओं और सल्फर यौगिकों को भी हवा में जोड़ता है।
🩺 अस्थमा और COPD वाले लोग क्या करें?

डॉक्टरों की आम सलाह इस तरह है:
✔️ क्या करें:
🔹 धुएं और पटाखों से दूर रहें, खासकर शाम और रात को
🔹 घर की खिड़कियां और दरवाज़े बंद रखें
🔹 अगर घर में एयर प्यूरीफायर है तो उसे चलाएं
🔹 बाहर जाना ज़रूरी हो तो अच्छी फिट वाला N95 मास्क पहनें
🔹 दवाइयां नियमित लें। डॉक्टरों के अनुसार इन्हें बीच में छोड़ना नहीं चाहिए।
🔹 लक्षण बढ़ें तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें
❌ क्या न करें:
🔹 बिना डॉक्टर से पूछे इनहेलर या दवा की खुराक न बदलें
🔹 पटाखों के पास बच्चों या बुज़ुर्गों को न रखें
🔹 धुएं में व्यायाम या सुबह-शाम की सैर न करें
🚨 तुरंत मेडिकल मदद लें अगर:
सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो या सांस रुकती हुई लगे
होंठ या नाखून नीले पड़ने लगें
सीने में तेज़ दर्द हो
बोलने में भी सांस फूले
💡 HealthyRaho Tip: साधारण कपड़े का मास्क बारीक कणों को अच्छी तरह नहीं रोकता। अच्छी फिट वाला N95 मास्क बेहतर विकल्प है।
⚖️ तुलना: पारंपरिक पटाखे बनाम ग्रीन पटाखे
बात | पारंपरिक पटाखे | ग्रीन पटाखे (दावे) सेहत पर असर | सेहत पर असर |
|---|---|---|---|
बेरियम और भारी रसायन | मौजूद हो सकते | कम या नहीं (दावा | भारी रसायन फेफड़ों और सेहत के लिए नुकसानदेह |
कण उत्सर्जन (PM) | ज़्यादा | लगभग 30% कम (दावा) | असल हवा में कमी कम हो सकती है |
शोर | लगभग 160 dB तक | लगभग 110 से 125 dB | शोर बुज़ुर्गों, बच्चों और जानवरों पर भी असर डालता है |
पहचान | आसान नहीं | CSIR-NEERI लोगो और QR कोड | नकली पटाखों से जोखिम |
सेहत के लिए सुरक्षा | नहीं | सेहत के लिए सुरक्षा नहीं नहीं (पूरी तरह सुरक्षित नहीं) | दोनों से सांस की बीमारी बढ़ सकती है |
🏁 निष्कर्ष

ग्रीन पटाखे (Green Crackers) पारंपरिक पटाखों से कम नुकसानदेह हो सकते हैं, लेकिन "साफ" शब्द उन पर पूरी तरह लागू नहीं होता। लैब में मिले अच्छे आंकड़े असल हवा में कम दिखते हैं, और ज़्यादा संख्या में चलाने पर फ़ायदा घट जाता है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अभी जारी है, और उसका अंतिम फ़ैसला आना बाकी है।
सबसे सुरक्षित रास्ता यह है कि अस्थमा, COPD, दिल की बीमारी वाले लोग, बच्चे और बुज़ुर्ग पटाखों के धुएं से पूरी तरह दूर रहें। बाकी सभी को भी कम पटाखे चलाने और जिम्मेदारी से त्योहार मनाने की सलाह दी जाती है।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या ग्रीन पटाखे सांस के मरीज़ों के लिए सुरक्षित हैं?
👉 नहीं। डॉक्टरों के अनुसार ग्रीन पटाखों का धुआं भी अस्थमा और COPD के लक्षण बढ़ा सकता है। इसलिए इन मरीज़ों को किसी भी तरह के पटाखे के धुएं से दूर रहना चाहिए।
2. क्या पटाखों पर पूरा प्रतिबंध लग गया है?
👉 30 सितंबर 2026 की सुनवाई में कोर्ट ने पूरा प्रतिबंध न लगाने की बात कही थी। मामला 15 अक्टूबर के लिए टाला गया था, और इस लेख के प्रकाशन तक हमें अंतिम आदेश नहीं मिला।
3. 125 dB(AI) का क्या मतलब है?
👉 यह ध्वनि की सीमा है जो सरकार ने प्रस्तावित की है। यह एक तरह का मापदंड है जिससे पटाखों का शोर नापा जाता है। आम भाषा में, यह सीमा लगभग एक भारी ट्रैफ़िक जाम जैसी तेज़ आवाज़ के आसपास की है।
4. क्या बच्चों के आसपास पटाखे चलाना ठीक है?
👉 नहीं। बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं, और उन्हें धुएं से ज़्यादा खतरा होता है। पटाखे उनसे दूर चलाएं, और चलाते समय बड़ों की निगरानी ज़रूरी है।
5. पटाखों के धुएं से खांसी कितनी देर तक रह सकती है?
👉 यह हर व्यक्ति पर अलग होता है। अगर खांसी या सांस फूलना कुछ दिनों में ठीक न हो, या बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
6. क्या एयर प्यूरीफायर से फ़ायदा होता है?
👉 हां, एक अच्छा एयर प्यूरीफायर घर के अंदर की हवा से बारीक कणों को कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन यह बाहर के धुएं को पूरी तरह नहीं रोकता।
7. क्या दिवाली की रात बाहर सैर करना ठीक है?
👉 पटाखों के धुएं वाले इलाकों में बाहर जाने से बचें, खासकर अगर आपको सांस की कोई बीमारी है।
8. क्या दिल के मरीज़ों को भी खतरा है?
👉 हां। कुछ डॉक्टरों के अनुसार पटाखों का प्रदूषण दिल पर दबाव बढ़ा सकता है, इसलिए दिल के मरीज़ों को भी सावधान रहना चाहिए।
9. पटाखे चलाते समय सेहत की और क्या सावधानी रखें?
👉 आंखों को बचाएं, क्योंकि चिंगारी या मलबा आंख में लग सकता है। अगर ऐसा हो तो बिना आंख रगड़े तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।
10. क्या ग्रीन पटाखों के लिए सरकारी जांच होती है?
👉 सुनवाई में कहा गया कि CSIR-NEERI फॉर्मूले तय करता है और परीक्षण करता है, पर रिपोर्टों के अनुसार बाज़ार में जांच की व्यवस्था अभी पूरी तरह मज़बूत नहीं है।










