कल्पना कीजिए, आपका बच्चा पोलियो की सभी जरूरी खुराकें ले चुका है। भारत भी पोलियो-मुक्त है। फिर भी स्वास्थ्यकर्मी आपके बच्चे को पल्स पोलियो अभियान के दौरान दो बूंदें पिलाने के लिए कहते हैं। जब बीमारी देश से खत्म हो चुकी है, तो यह टीका आज भी क्यों जरूरी है?
इस सवाल का जवाब पोलियो के खिलाफ दुनिया की आखिरी लड़ाई को समझने में छिपा है।
हर साल 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इसकी थीम है “One Day. One Focus: Ending Polio” यानी एक दिन, एक लक्ष्य: पोलियो का अंत। रोटरी इंटरनेशनल के आधिकारिक अभियान के अनुसार, 1988 के बाद से दुनिया में जंगली पोलियो के मामलों में 99% से अधिक की कमी आई है।
लेकिन कहानी अभी पूरी नहीं हुई है। आइए जानें कि पोलियो लगभग खत्म होने के बावजूद दुनिया इससे पूरी तरह सुरक्षित क्यों नहीं है और माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं।
📝 इस आर्टिकल में आप जानेंगे
🌍 विश्व पोलियो दिवस 2026 की थीम और महत्व।
🦠 पोलियो कैसे फैलता है और कितना खतरनाक है?
🇮🇳 भारत पोलियो-मुक्त होने के बाद भी टीकाकरण क्यों करता है?
💉 OPV और IPV में क्या अंतर है?
👶 बच्चों की कोई खुराक छूट जाए तो क्या करें?
🌍 विश्व पोलियो दिवस 2026: आखिरी लड़ाई इतनी मुश्किल क्यों?

पोलियो एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। वायरस तंत्रिका तंत्र पर हमला करके स्थायी लकवा पैदा कर सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, लगभग 200 संक्रमणों में से एक संक्रमण अपरिवर्तनीय लकवे का कारण बन सकता है। लकवे से प्रभावित लोगों में 5–10% की मृत्यु हो सकती है, जब सांस लेने वाली मांसपेशियां काम करना बंद कर देती हैं।
यही वजह है कि पोलियो को केवल एक सामान्य बचपन की बीमारी समझना गलत होगा।
🎯 इस साल की थीम क्या संदेश देती है?
“One Day. One Focus: Ending Polio” का संदेश है कि पोलियो उन्मूलन के अंतिम चरण में भी लगातार प्रयास जरूरी हैं।
जंगली पोलियो वायरस टाइप-1 (WPV1) का संचरण अभी भी अफगानिस्तान और पाकिस्तान में चुनौती बना हुआ है। GPEI की 7 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्ट में अफगानिस्तान में 35 और पाकिस्तान में 5 मामले दर्ज थे। ये उस तारीख तक के आंकड़े हैं, पूरे साल के अंतिम आंकड़े नहीं।
इसका अर्थ है कि किसी देश में संक्रमण खत्म होने के बाद भी दूसरे देश से वायरस दोबारा पहुंचने का जोखिम बना रह सकता है।

🇮🇳 भारत पोलियो-मुक्त है, फिर भी बच्चों को बूंदें क्यों पिलाई जाती हैं?
भारत में जंगली पोलियो वायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में सामने आया था। इसके बाद WHO ने 27 मार्च 2014 को दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र को पोलियो-मुक्त प्रमाणित किया।

यह बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन पोलियो-मुक्त होने का अर्थ यह नहीं कि भविष्य में संक्रमण का खतरा हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
जब तक दुनिया में वायरस का संचरण जारी है, अंतरराष्ट्रीय यात्रा और लोगों की आवाजाही से इसके दूसरे देशों तक पहुंचने की संभावना बनी रहती है। यदि किसी समुदाय में पर्याप्त बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ हो, तो संक्रमण फैल सकता है।
💧 पल्स पोलियो अभियान कैसे मदद करता है?
पल्स पोलियो अभियान के दौरान निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को मुंह से पोलियो वैक्सीन की बूंदें दी जाती हैं। भारत में यह अभियान आम तौर पर पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर केंद्रित होता है।
इसका उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों को अतिरिक्त सुरक्षा देना और वायरस के प्रसार को रोकने में मदद करना है।
याद रखें: नियमित टीकाकरण और पल्स पोलियो अभियान एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं। बच्चे की नियमित खुराकें पूरी कराना भी जरूरी है और अभियान के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों के निर्देशों का पालन करना भी।
💉 OPV और IPV में क्या अंतर है?

पोलियो से बचाव के लिए दो प्रमुख प्रकार की वैक्सीन इस्तेमाल होती हैं। दोनों की भूमिका अलग है।
विशेषता | OPV | IPV |
|---|---|---|
पूरा नाम | Oral Polio Vaccine | Inactivated Polio Vaccine |
कैसे दी जाती है? | मुंह से बूंदें | इंजेक्शन |
मुख्य लाभ | आंतों में प्रतिरक्षा विकसित करने और वायरस का प्रसार रोकने में मदद | पोलियो से लकवे के खिलाफ सुरक्षा |
क्या वैक्सीन से पोलियो हो सकता है? | अत्यंत दुर्लभ परिस्थितियों में वैक्सीन-जनित वायरस का जोखिम होता है | निष्क्रिय वायरस होने के कारण IPV से पोलियो संक्रमण नहीं होता |
WHO के अनुसार, OPV बड़े टीकाकरण अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जबकि IPV शरीर में ऐसी प्रतिरक्षा विकसित करती है जो वायरस को तंत्रिका तंत्र तक पहुंचने से रोकने में मदद करती है।
किस बच्चे को कौन-सी खुराक कब देनी है, यह लागू राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के अनुसार तय होता है।
🧬 क्या पोलियो की वैक्सीन से भी खतरा हो सकता है?
यह सवाल अक्सर लोगों को भ्रमित करता है।
OPV में कमजोर किया गया जीवित वायरस होता है। बहुत दुर्लभ परिस्थितियों में, यदि यह वायरस कम टीकाकरण वाले समुदाय में लंबे समय तक फैलता रहे, तो आनुवंशिक बदलावों के बाद ऐसा वायरस बन सकता है जो बीमारी पैदा करने में सक्षम हो। इसे circulating vaccine-derived poliovirus (cVDPV) कहा जाता है।
इसका समाधान टीकाकरण से बचना नहीं, बल्कि समुदाय में टीकाकरण का उच्च स्तर बनाए रखना और स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों का पालन करना है। WHO की वैक्सीन संबंधी जानकारी इस अंतर को विस्तार से समझाती है।
👶 माता-पिता के लिए 4 जरूरी बातें

पोलियो से बचाव के लिए कुछ आसान कदम बेहद महत्वपूर्ण हैं।
1. नियमित टीकाकरण पूरा कराएं। बच्चे की उम्र के अनुसार जरूरी OPV और IPV खुराकों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की टीकाकरण समय-सारणी देखें या स्वास्थ्यकर्मी से पूछें।
2. अभियान के दौरान बूंदें जरूर दिलाएं। यदि बच्चा निर्धारित आयु वर्ग में है, तो पहले खुराकें मिल चुकी होने के बावजूद पल्स पोलियो अभियान में भाग लें।
3. खुराक छूटने पर घबराएं नहीं। बच्चे का टीकाकरण कार्ड लेकर सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। स्वास्थ्यकर्मी आगे की खुराकों के बारे में सही मार्गदर्शन देंगे।
4. अफवाहों से बचें। वैक्सीन से जुड़ी जानकारी के लिए WHO, स्वास्थ्य मंत्रालय और योग्य डॉक्टरों पर भरोसा करें। सोशल मीडिया पर मिले अप्रमाणित संदेशों के कारण टीकाकरण न टालें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. विश्व पोलियो दिवस 2026 कब है?
👉 24 अक्टूबर 2026, शनिवार को।
2. विश्व पोलियो दिवस 2026 की थीम क्या है?
👉 “One Day. One Focus: Ending Polio” यानी एक दिन, एक लक्ष्य: पोलियो का अंत।
3. भारत में आखिरी पोलियो मामला कब आया था?
👉 जंगली पोलियो वायरस का आखिरी मामला 13 जनवरी 2011 को हावड़ा, पश्चिम बंगाल में सामने आया था।
4. क्या पोलियो का इलाज संभव है?
👉 पोलियो संक्रमण को खत्म करने वाला कोई विशिष्ट उपचार उपलब्ध नहीं है। टीकाकरण इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
5. क्या नियमित टीकाकरण के बाद भी पल्स पोलियो की बूंदें देनी चाहिए?
👉 हां। अभियान के दौरान निर्धारित आयु वर्ग के बच्चों को बूंदें दी जाती हैं, भले ही वे नियमित टीकाकरण करा चुके हों।
🏁 निष्कर्ष: आखिरी बच्चे तक टीका पहुंचाना ही असली लक्ष्य
विश्व पोलियो दिवस 2026 हमें याद दिलाता है कि पोलियो के खिलाफ दुनिया ने बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन अंतिम लक्ष्य अभी बाकी है। भारत की पोलियो-मुक्त उपलब्धि को बनाए रखने के लिए नियमित टीकाकरण, पल्स पोलियो अभियान और सही जानकारी जरूरी हैं।
इस 24 अक्टूबर को अपने बच्चे का टीकाकरण रिकॉर्ड जांचें, कोई खुराक छूटी हो तो स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लें और सही जानकारी दूसरों तक पहुंचाएं।
HealthyRaho.in की अपील: हर बच्चे की सुरक्षा जरूरी है इसीलिए टीकाकरण पूरा कराएं, जागरूकता बढ़ाएं और पोलियो-मुक्त दुनिया बनाने में योगदान दें। 🙏










