No Sugar लिखा है… फिर भी नुकसान? शुगर से ज़्यादा खतरनाक ये एक चीज़
😍 BMI कैलकुलेटर से अपना बॉडी मास इंडेक्स जानें - Click Here 👈हम सब ये बात तो मानते ही हैं कि रिफाइंड शुगर सेहत के लिए अच्छी नहीं होती।
ज़्यादा चीनी खाना मोटापा, डायबिटीज़ और कई दूसरी समस्याओं की वजह बन सकता है।
लेकिन क्या आपको पता है कि आज के समय में एक ऐसी चीज़
👉 लगभग हर पैकेज्ड फूड में डाली जा रही है
👉 जिसके बारे में कोई खुलकर चेतावनी नहीं देता
👉 और जो कई मामलों में शुगर से भी तेज़ नुकसान करती है?
अगर आप भी breakfast cereals, biscuits, instant noodles या “no sugar” products खाते हैं,
तो यह लेख आपके लिए बहुत ज़रूरी है।
🤔 आखिर वो चीज़ है कौन?
जिस इंग्रीडिएंट की बात हो रही है, उसका नाम है - Maltodextrin
यह कोई नया या बैन किया गया केमिकल नहीं है।
बल्कि यह एक बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला प्रोसेस्ड कार्बोहाइड्रेट है,
जो आमतौर पर:
Corn (मकई)
Rice (चावल)
Potato (आलू)
Wheat (गेहूं)
से बनाया जाता है।
👉 स्वाद हल्का मीठा या बिल्कुल फीका हो सकता है,
इसीलिए इसे पहचानना आसान नहीं होता।
📊 शुगर से ज़्यादा खतरनाक क्यों कहा जा रहा है?
इसका जवाब छिपा है एक शब्द में — Glycemic Index (GI)।
सरल भाषा में:
Glycemic Index बताता है कि
कोई खाना खाने के बाद ब्लड शुगर कितनी तेजी से बढ़ती है
खाद्य पदार्थ | Glycemic Index |
|---|---|
Refined Sugar (चीनी) | ~65 |
Maltodextrin | 85 – 105 |
✅ इसका मतलब:
Maltodextrin शरीर में बहुत तेज़ी से ग्लूकोज़ में बदलता है
कई बार इसका असर चीनी से भी तेज़ होता है
यही वजह है कि इससे:
ब्लड शुगर तेजी से बढ़ती है
इंसुलिन spike होता है
कुछ देर बाद ज़्यादा भूख लगती है
मोटापा और डायबिटीज़ का खतरा बढ़ता है
🏭 कंपनियां इसका इस्तेमाल इतना क्यों करती हैं?
क्योंकि Maltodextrin:
सस्ता होता है
खाने को smooth texture देता है
shelf life बढ़ाता है
product को bulky बनाता है
और सबसे बड़ा फायदा 👇
👉 इसे डालकर पैक पर “No Sugar” लिखा जा सकता है
यही कारण है कि consumer धोखे में आ जाता है।
🥣 ये किन-किन चीज़ों में छुपा होता है?
आज के समय में Maltodextrin आमतौर पर मिलता है:
Breakfast cereals
Protein bars
Energy bars
Instant noodles
“Healthy” biscuits
Packaged soups
Energy drinks
Sugar-free products
Ice creams
⚠️ कुछ low-quality baby foods में भी
👉 यानी वो चीज़ें जिन्हें हम अक्सर healthy समझ लेते हैं।
🚨 “No Sugar” लिखा है फिर भी खतरा क्यों?
क्योंकि:
Maltodextrin को legally sugar की category में नहीं गिना जाता
Nutritional label पर sugar = 0 दिखता है
लेकिन शरीर के अंदर इसका behaviour
👉 शुगर जैसा या उससे भी तेज़ होता है
इसलिए “Sugar Free” लिखे प्रोडक्ट
👉 हर किसी के लिए safe नहीं होते।
❗ क्या Maltodextrin सच में “Silent Killer” है?
यहाँ पूरा सच समझना ज़रूरी है।
✅ Maltodextrin नुकसानदेह हो सकता है अगर:
आपकी lifestyle sedentary है
आप रोज़ packaged food खाते हैं
आप weight loss की कोशिश में हैं
आपको diabetes या pre-diabetes है
आपकी diet में fiber कम है
❌ लेकिन ये ज़हर नहीं है:
Limited मात्रा
Active lifestyle
Fiber, protein और healthy fats के साथ
➡️ तब इसका असर कम हो जाता है
👉 असली समस्या है Ultra-Processed Diet Pattern।
🧠 शरीर में ये कैसे नुकसान करता है?
Maltodextrin:
ब्लड शुगर तेजी से बढ़ाता है
Insulin resistance को बढ़ावा दे सकता है
बार-बार भूख लगने की आदत डालता है
Overeating आसान बना देता है
लंबे समय में इससे:
Type-2 diabetes
Belly fat
Metabolic disorders
का रिस्क बढ़ सकता है।
🔍 लेबल पढ़ने का तरीका
खरीदारी करते वक्त Ingredient List ज़रूर देखें।
अगर ये नाम दिखें, तो सतर्क हो जाइए:
Maltodextrin
Modified starch
Dextrose
Maltose
Corn syrup solids
👉 Ingredients जितने ऊपर लिखा हो,
👉 मात्रा उतनी ज्यादा होती है।
✅ HealthyRaho Verdict
✔️ Maltodextrin का GI शुगर से ज्यादा हो सकता है
✔️ “No Sugar” claim हमेशा safe नहीं होता
👉 सही रास्ता है:
Whole foods चुनना
Packaged food कम करना
Ingredients पढ़ने की आदत डालना
🤔 FAQs – और ज़रूरी सवाल जो लोग अक्सर पूछते हैं
1. क्या Maltodextrin रोज़ थोड़ा-सा लेने से भी नुकसान होता है?
अगर Maltodextrin कभी-कभार और छोटी मात्रा में लिया जाए, और आपकी lifestyle active हो, तो तुरंत नुकसान नहीं दिखता।
लेकिन अगर यह चीज़ रोज़ाना packaged foods के ज़रिए आपकी डाइट में शामिल है, तो धीरे-धीरे metabolic problems का risk बढ़ सकता है।
2. क्या Maltodextrin वजन कम करने में रुकावट डाल सकता है?
हाँ, बिल्कुल।
क्योंकि:
यह तेज़ी से ब्लड शुगर बढ़ाता है
फिर जल्दी भूख लगती है
cravings बढ़ती हैं
Weight loss कर रहे लोगों के लिए यह invisible barrier बन सकता है — खासकर जब “diet” या “low sugar” snacks में छुपा हो।
3. क्या Maltodextrin gut health को भी प्रभावित करता है?
कुछ studies और observations बताते हैं कि:
ज़्यादा processed carbs
Gut bacteria balance को disturb कर सकते हैं
Long term में इससे:
Bloating
Digestion issues
Gut inflammation
जैसी problems दिख सकती हैं, खासकर sensitive लोगों में।
4. क्या Maltodextrin और refined flour (maida) एक जैसे हैं?
पूरी तरह नहीं, लेकिन दोनों highly processed carbs हैं।
Maida → refined grain product
Maltodextrin → refined starch product
👉 दोनों का असर:
तेज़ digestion
Blood sugar spikes
Low satiety
इसलिए दोनों को रोज़ाना डाइट में ज़्यादा जगह देना सही नहीं माना जाता।
5. Protein powder में Maltodextrin देखना चाहिए या नहीं?
हाँ, ज़रूर देखना चाहिए।
बहुत से affordable protein powders में:
Maltodextrin
Added sugars
Fillers
मिले होते हैं।
👉 अगर protein powder में Maltodextrin पहले या दूसरे नंबर पर लिखा है,
तो इसका मतलब है कि protein content से ज़्यादा filler content है।
6. क्या Maltodextrin “natural” ingredient माना जा सकता है?
Source natural हो सकता है (corn, rice, potato),
लेकिन processing इतना ज़्यादा होता है कि इसे natural food नहीं कहा जा सकता।
यह industrially processed ingredient है, natural whole food नहीं।
7. क्या डायबिटीज़ न होने पर भी Maltodextrin से सावधान रहना चाहिए?
हाँ।
क्योंकि:
आज diabetes नहीं है
इसका मतलब ये नहीं कि future में risk नहीं हो सकता
Regular high-GI foods insulin resistance को gradually बढ़ा सकते हैं,
इसलिए prevention के लिए भी awareness ज़रूरी है।
8. क्या Maltodextrin और artificial sweeteners एक ही चीज़ हैं?
नहीं।
Maltodextrin → carbohydrate है
Artificial sweeteners → sweetness देते हैं लेकिन calorie नहीं
Problem तब होती है जब:
👉 Artificial sweetener + Maltodextrin
दोनों एक ही product में हों (कई “Sugar Free” items में ऐसा होता है)
9. Maltodextrin completely avoid करना चाहिए या limit करना काफी है?
HealthyRaho की राय में:
Avoid panic, but
Frequent use avoid करें, और
daily diet में limit रखें
👉 Occasional exposure ठीक है
👉 Daily, unconscious exposure problem है
✅ निष्कर्ष
आज के समय में सिर्फ चीनी कम कर देना ही सेहत के लिए काफी नहीं है।
असल ज़रूरत है यह समझने की कि हम कौन-सी चीज़, कितनी मात्रा में और कितनी बार खा रहे हैं।
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